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विटामिन डी क्यों इतना महत्वपूर्ण है? Why Vitamin D is so important?

विटामिन डी क्यों इतना महत्वपूर्ण है? Why Vitamin D is so important?

एक स्वस्थ शरीर के लिए अनेकों विटामिन की जरूरत होती है, विटामिन डी उन्हीं में से एक है। अगर आप बीमारियों से दूर रहना चाहते हैं तो आपको दूसरे पोषक तत्वों की तरह विटामिन डी से भरपूर चीजों को अपनी डाइट में रोजाना शामिल करना चाहिए।

 दरअसल  विटामिन डी हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण विटामिनों में से एक है। विटामिन डी शरीर में कई महत्वपूर्ण काम करता है। विटामिन डी का प्रभाव विशेष रूप से हड्डियों के साथ-साथ शरीर की सभी प्रणालियों पर पड़ता है।सेहतमंद बने रहने के लिए यह सबसे जरूरी है कि हमारे शरीर में सभी जरूरी पोषक तत्वों की मात्रा पूरी रहे, क्योंकि इनकी कमी की वजह से कई शारीरिक परेशानियों को झेलना पड़ता है. कई बार तो पोषक तत्वों की कमी के चलते लोगों को गंभीर बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है जिनमें कई जानलेवा होती है ।Tata 1mg labs ने एक सर्वे किया है, जिसमें डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे के मुताबिक, भारत की 76 प्रतिशत आबादी में विटामिन डी (Vitamin D) की कमी पाई गई हैयह डेटा भारत के लगभग 27 शहरों में रहने वाले 2.2 लाख से ज्यादा लोगों के परीक्षण पर आधारित है । सर्वे से पता चला है कि 25 साल और उससे कम उम्र के लोग इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। परीक्षण के मुताबिक, सूरत और वड़ोदरा में विटामिन डी की कमी वाले लोगों की संख्या ज्यादा है।युवाओं में इस विटामिन की कमी सबसे ज्यादा देखने को मिली। 25 साल तक के 84 प्रतिशत युवाओं में विटामिन डी की कमी पाई गई।जबकि 25-40 एजग्रुप के 81 प्रतिशत लोगों में ऐसी स्थिति देखी गई,40 से ऊपर की आयुवर्ग में यह कमी 76% पायी गई ।

सबसे पहले यह जान लेते है कि विटामिन डी क्या होता है ?

विटामिन डी वसा में आसानी से घुलने वाले स्रावी स्टेरॉयड का एक समूह है जिसके अंतर्गत डी1, डी2 और डी 3 आते हैं। विटामिन डी अनेक पोषक तत्व जैसे कि कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फेट आदि को आंतों द्वारा अवशोषित होने में मदद करता है। विटामिन डी को “सनशाइन विटामिन (sunshine vitamin)” भी कहा जाता है क्योंकि यह सूरज की रोशनी के माध्यम से त्वचा में पैदा होता है।

विटामिन डी के कितने प्रकार होते है?

विटामिन डी दो प्रकार के होते हैं जिसमें पहला विटामिन डी2 (एग्रो कैल्सी फेरल) और दूसरा विटामिन डी 3 (कॉलेकैल्सिफेरॉल) है।

विटामिन डी2 का  मनुष्य के शरीर में उत्पादन नहीं होता है, इसे पौधों से प्राप्त किया जाता है। पौधे विटामिन डी2 का उत्पादन सूरज की पराबैंगनी किरणों की उपस्थिति में करते हैं।

मनुष्य के शरीर में विटामिन डी 3 का उत्पादन होता है। इस विटामिन का निर्माण मनुष्य द्वारा सूरज की किरणों से प्रतिक्रिया होने पर होता है। विटामिन डी3 को मछलियों के सेवन और दूसरे भी अन्य खानपान की चीजों से प्राप्त किया जा सकता है।

विटामिन डी2 और विटामिन डी3 में क्या अंतर होता है?

शरीर को विटामिन डी2 (Vitamin D2) और विटामिन डी3 (Vitamin D3) दोनों की जरूरत होती है और दोनों मिलकर विटामिन डी की जरूरत को पूरा करते हैं। विटामिन डी3 और विटामिन डी2 के गुण एक दूसरे से कुछ मायनों में अलग हैं। जैसा कि पहले ही बताया गया है कि विटामिन डी वसा घुलनशील विटामिन होता है जो दो विटामिन डी2 (अर्गोंकैल्सिफेरॉल) और विटामिन डी3 (कॉलेकैल्सिफेरॉल) से मिलकर बना होता है। लेकिन दोनों का स्रोत एक दूसरे से बिल्कुल अलग होता है। विटामिन डी3 सूर्य प्रकाश और  पशुओं से मिलता है, जैसे- मछली, फिश ऑयल, अंडे की जर्दी, मक्खन और डायटरी सप्लीमेंट्स,  तो डी2 पौधों से जैसे- मशरूम (लेकिन जो धूप में उगे हुए होते हैं) और फॉर्टिफाइड फूड्स से मिलता है।

विटामिन डी (Vitamin D) का प्रमुख स्रोत सूरज की किरणें हैं, जिसमें अल्ट्रावायलट बी (यूवीबी) होता है। वह त्वचा में 7-डिहाइड्रोकोलेस्टेरॉल यौगिक के साथ संयोजन करके विटामिन डी3 बनाने का काम करता है। इसी तरह की प्रक्रिया पौधों और मशरूम से होती है। यहां भी अल्ट्रावायलट किरणें पौधों में मौजूद तेल के यौगिक के साथ मिलकर विटामिन डी2 बनाते है।

आपके शरीर को मिल रहे विटामिन डी2 (Vitamin D2) और विटामिन डी3 (Vitamin D3) को लीवर की मेटाबॉलिक प्रक्रिया द्वारा कैल्सिफेडॉल में बदलने का काम करता है। लीवर मेटाबोलिक  प्रक्रिया द्वारा विटामिन डी2 को 25-हाइड्रोक्सीविटामिन डी2 और विटामिन डी3 को 25-हाइड्रोक्सीविटामिन डी3 में बदल देता है । शोध के अनुसार इस प्रक्रिया के दौरान दोनों का उत्पादन भिन्न-भिन्न मात्रा में होता है, जिसके यौगिक को कैल्सिफेडॉल कहते हैं। कैल्सिफेडॉल खून में  इसके स्तर से पता चलता है कि शरीर में इसकी मात्रा कितनी है। 

विटामिन डी3 की कमी क्यों होती है?

हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी के मुख्य कारण  हैं:-

कम सूर्य प्रकाश मिलना- 

विटामिन डी3 की कमी मूलतः इसलिए होती है क्योंकि शरीर इस विटामिन को तभी बनाता है जब वह सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आता है। इसलिए अगर आप कम से कम धूप के संपर्क में आते है या घर में ही रहते हैं तो आप में विटामिन डी3 की कमी होने की संभावना ज्यादा रहती है। अगर कहीं सिर को ढककर रखने की प्रथा है या ऐसा काम करते हैं जिससे आप धूप के संपर्क में कम रहते हैं या ऐसी किसी जगह में रहते हैं जहां धूप कम उगती है तो वहां विटामिन डी3 की कमी (Vitamin D3 Deficiency) होने की संभावना ज्यादा होता है।

कम हिस्से से सूर्य  प्रकाश ग्रहण करना -  

सूरज की किरणें कपड़ो के आर पार नहीं जा सकती  जिसकी वजह से शरीर पर  पर्याप्त सीधी रोशनी नहीं पड़ती इस वजह से शरीर सूरज से  बहुत कम विटामिन डी प्राप्त करता है।

 त्वचा का रंग-   

अगर त्वचा का रंग काला या सांवला है तो त्वचा का मेलानीन सूर्य की किरणों को शरीर में प्रवेश करने से रोकता है और जिसके कारण विटामिन डी बनने की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती है।

कमजोर  किडनी 

असल में हड्डियों के विकास के लिए कैल्शियम और विटामिन डी3 की जरूरत होती है और किडनी कैल्सीटेरॉल नाम का एक हार्मोन उत्पादित करता है जो हड्डियों को ब्लड से सही मात्रा में कैल्शियम लेने में सहायता करता है इसलिए किडनी के सही तरह से काम न करने पर विटामिन डी3 (Vitamin D3) अपना काम नहीं कर पाती है। जिसके कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।

अधिक बाडी मास इंडैक्स-

अक्सर ये भी होता है कि रक्त से वसा की कोशिकायें विटामिन डी3 (Vitamin D3) को सोख लेती है जिसके कारण विटामिन डी की कमी हो जाती है, यानि बॉडी मास इंडेक्स जितना ज्यादा होगा शरीर में विटामिन डी की कमी उतनी ही होगी ।

विटामिन डी के फायदे क्या होते हैं?

विटामिन ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर नहीं बना सकता, इसलिए एक व्यक्ति को आहार में इनका सेवन करना चाहिए। हालांकि, शरीर विटामिन डी का उत्पादन सूरज की रोशनी और आहार दोनों से कर सकता है  यह  जानना भी जरूरी है कि इस विटामिन के शरीर में क्या क्या  फायदे होते हैं-

  • हड्डियों और दाँतो को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखना
  • शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को बनाए रखने में सहयोग करना
  • मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को  स्वस्थ रखना
  • इंसुलिन (insulin) और शुगर का संतुलन बनाए रखना
  • फेफड़ों की कार्यक्षमता और हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखना
  • कैंसर के विकास में शामिल जीन्स को कंट्रोल करना 

शरीर में विटामिन डी कैसे बनता है?

जब हमारी त्वचा सूरज की रोशनी (धूप) के संपर्क में आती है, तब कोलेस्ट्रॉल के माध्यम से से विटामिन डी बनाती है। सूर्य की रोशनी से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट बी (ultraviolet B, UVB ) किरणें त्वचा की कोशिकाओं में जाकर कोलेस्ट्रॉल नामक पदार्थ से टकराती हैं, जिससे संश्लेषण की प्रक्रिया होती है और शरीर में विटामिन डी बनता है।

 हालांकि जरूरत से अधिक सूरज की रोशनी के नुकसान भी हो सकते हैं जैसे त्वचा में जलन, एलर्जी और त्वचा लाल पड़ जाना। इसी कारण हमें सूरज की रोशनी पर्याप्त मात्रा में और निश्चित समय के लिए ही लेनी चाहिए।

विटामिन डी की कमी के क्या लक्षण होते हैं?

शरीर में विटामिन डी की कमी होने पर आप खुद में अनेक लक्षणों का अनुभव करते हैं। विटामिन डी का स्तर कम होने पर निम्न लक्षण देखे जा सकते हैं:-

  • अक्सर बीमार महसूस करना विटामिन-डी का एक आम संकेत है, जिसके बारे में ज़्यादा लोग नहीं जानते। क्योंकि विटामिन-डी इम्यूनिटी को बढ़ावा देता है, इसकी कमी होने पर शरीर कई वायरस से लड़ने की क्षमता खोने लगता है। जिसकी वजह से लोग जल्दी-जल्दी बीमार पड़ते हैं।
  • थकान महसूस करना:- पूरे दिन थकावट महसूस करना विटामिन डी की कमी के मुख्य लक्षणों में से एक है। अगर नींद पूरी होने के बाद भी आपको थकान और कमजोरी महसूस होती है तो यह विटामिन की कमी का संकेत हो सकता है।
  • हड्डियों और पीठ में दर्द:- हड्डियों और खासकर  पीठ में दर्द होना विटामिन डी की कमी के लक्षण हैं। कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है, लेकिन विटामिन डी की कमी होने के कारण कैल्शियम शरीर में अब्जॉर्ब नहीं होता है।
  • घाव ठीक नहीं होना:- शरीर में विटामिन डी कमी होने पर घाव या चोट जल्दी ठीक नहीं होते हैं। साथ ही, विटामिन डी की कमी के कारण जलन और इन्फेक्शन का खतरा भी होता है।
  • बालों का झड़ना:- कुछ मामलों में विटामिन डी की कमी के कारण बाल झड़ने की समस्या भी सामने आती है। विटामिन डी एक न्यूट्रिएंट है जो हेयर फॉलिकल को बढ़ाता है, लेकिन जब शरीर में इसकी मात्रा कम होती है तो बाल गिरने की समस्या सामने आती है।
  • मूड में बदलाव आना:- विटामिन डी की कमी होने पर आपके मूड में अचानक बदलाव आ सकता है। कुछ मामलों में आपको अवसाद (डिप्रेशन) भी हो सकता है।
  • जिन लोगों के शरीर में विटामिन-डी की पर्याप्त मात्रा नहीं होती, उनकी त्वचा पर रैशेज़ और एक्ने आम बात है। ऐसे लोगों में त्वचा समय से पहले बूढ़ी भी दिखने लगती है।
  • विटामिन-डी 3 की कमी के अन्य लक्षण:अगर आप खुद में इन लक्षणों को अनुभव करते हैं तो डॉक्टर से परामर्श करने के बाद आपको विटामिन डी का टेस्ट कराना चाहिए। साथ ही, इसे विटामिन डी को कैसे बढ़ाया जाए इस बारे में भी डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

विटामिन डी की कमी के कारण  क्या होते है?

अगर आपके मन में भी यह प्रश्न उठता है कि आखिर क्यों कम होता है शरीर में विटामिन-डी का लेवल तो हम नीचे आपको इसके कुछ मुख्य कारणों के बारे में बता रहे हैं:-

  • अधिकतर समय तक कमरे में रहना
  • धूप में नहीं निकलना
  • डेयरी उत्पाद जैसे - दूध, दही और मक्खन का सेवन कम करना या नहीं करना 
  • फास्ट फूड्स और कोल्ड ड्रिंक्स का अधिक सेवन करना
  • नाइट शिफ्ट में काम करना
  • गर्भवती होना
  • शाकाहारी लोगों में विटामिन डी की कमी का खतरा अधिक होता है
  • पौष्टिक तत्वों का कम अवशोषण 
  • दवा की टैबलेट, कैप्सूल आदि  निगलने में परेशानी होना।

 खाद्य पदार्थ जो शरीर में विटामिन डी की आपूर्ति करते हैं, जानिए-

  • साल्मन (Salmon), हेरिंग (Herring) और सार्डिन (sardines) जैसी वसायुक्त मछलियाँ जो विटामिन डी का महत्वपूर्ण स्रोत है।
  • कॉड मछली के लीवर का तेल
  • अंडे की जर्दी (Egg yolks)
  • मशरूम
  • इन सभी खाद्य पदार्थों में विटामिन डी प्रकृतिक रूप से नहीं पाया जाता, लेकिन इन्हें पैक करते समय इनमें कुछ मात्रा में मिला दिया जाता है (fortification)।
  • गाय का दूध और सोया का दूध
  • संतरे का रस (Orange juice)
  • अनाज और ओट्स

विटामिन डी की कमी से होने वाली क्या क्या  समस्या होती हैं?

हालांकि हमारा शरीर विटामिन डी का उत्पादन कर सकता है, इसके बावजूद भी किन्ही कारणों से शरीर में इसकी कमी हो सकती है। विटामिन डी इस कमी के कारण शरीर में कई तरह की समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। क्या हैं वे समस्याएँ जानिए-

  • थकान और सुस्त महसूस करना
  • हड्डियों और पीठ में दर्द होना
  • मन उदास रहना
  • बाल झड़ना
  • मासपेशियों में दर्द होना
  • कोई घाव जल्दी से न भर पाना
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली

विटामिन डी का लो लेवल हो ,तो न करें 8 चीजों का सेवन- 

 क्या आप जानते हैं कि विटामिन डी की कमी होने पर आपको कौन-कौन से फूड्स का सेवन नहीं करना चाहिए?

इस बात का ध्यान रखें कि विटामिन डी की कमी या फिर ज्यादा होना भी हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक होता है। आइए जानते हैं कौन सी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

1-गैस बनाने वाली चीजों का सेवन न करें

अगर आपको लगे कि आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो गई है और उसका पूरा करने के लिए आप किसी प्रकार के फूड्स की तलाश कर रहे हैं तो भूलकर भी ऐसी चीजों को न चुनें, जो पेट में गैस बनाने का काम करती हैं। गैस बनाने वाले फूड्स विटामिन डी के लेवल को बढ़ाने के बजाए कम करते हैं, इसलिए ऐसे फूड्स से बचें।

अगर आप सलाद के शौकीन हैं या फिर डाइटिंग के दौरान आपको सलाद खाने को कहा गया है तो थोड़ा संभलकर ही इनका सेवन करें। शरीर में विटामिन डी की कमी होने पर सलाद भी कम खाना चाहिए, क्योंकि आपको ऐसे फूड्स का सेवन करने की जरूरत होती है, जिनमें विटामिन डी हो न कि फाइबर।

3- फास्ट फूड से बचें

जिन लोगों के शरीर में विटामिन डी की कमी होती है उन्हें हमेशा फास्ट फूड अधिक नहीं खाना चाहिए। फास्ट फूड या फिर तले हुए खाद्य पदार्थ आपको मोटा बनाने का काम करते हैं, जिसके कारण शरीर पर मांस बढ़ जाता है और आपके लिए सूरज की रोशनी से विटामिन डी अवशोषित कर पाना मुश्किल हो जाता है, इसलिए फास्ट फूड से बचें।

4-थाली से इन चीजों को हटाएं

विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए डाइट में हेल्दी चीजों का होना बहुत ही जरूरी है। इसलिए आपको अपनी थाली का ख्याल रखने की जरूरत होती है। आपको अपनी थाली में इन फूड्स को शामिल नहीं करना चाहिए, जिसमें छोले ,राजमा व जल्दी ना पचने वाले पदार्थ अधिक शामिल हैं। ऐसे फूड्स से दूरी बनाए क्योंकि ये आपके पेट में गैस बनाने का काम करते हैं और ऐसे फूड्स आपको नहीं खाने चाहिए।

5-नींद का रखें ध्यान

जिन लोगों के शरीर में विटामिन डी की कमी होती उन्हें हमेशा दिन में कम सोना चाहिए। इसके अलावा उन्हें रात को देर रात तक नहीं जागना चाहिए। दरअसल सुबह के वक्त सूरज की रोशनी आपके शरीर में विटामिन डी के लेवल को बढ़ाने का काम करती है और आप अपने घर में सो रहे होते हैं तो निश्चित ही आप इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। आपको अपनी इस आदत को बदलने की जरूरत है।

6-ठंडी चीजों से बनाएं दूरी

शरीर में विटामिन डी की कमी होने पर आपको कभी भी फ्रिज में रखा हुआ भोजन नहीं खाना चाहिए । इसके अलावा आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक जैसी ठंडी चीजों का सेवन भी कम से कम करना चाहिए क्योंकि ये आपकी हड्डियों को कमजोर बनाने का काम करती हैं और आपके शरीर में विटामिन डी का लेवल और कम होना शुरू हो जाता है।

7-खट्टी चीजों का सेवन कम करें

शरीर में विटामिन डी की कमी होने पर आपको हमेशा खट्टे पदार्थों जैसे कि अचार ,चटनी का भी कम सेवन करना चाहिए। अचार जैसी खट्टी चीजें के सेवन से आपकी हड्डियों का घनत्व कम होता जाता है और विटामिन डी की कमी होने से कैल्शियम भी अवशोषित नहीं कर पाता है। इसलिए आपको विटामिन डी की कमी होने पर भूलकर भी खट्टी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।


यदि विटामिन डी 3 की कमी लंबे समय से चली आ रही हो तो क्या समस्याएँ आती हैं?

ऑस्टियोपोरोसीस या फ्रैक्चर (Osteoporosis and fracture)

विटामिन डी3 ब्लड से कैल्शियम सोखने में अहम् भूमिका निभाता है। तो आप समझ ही सकते हैं कि विटामिन डी3 की कमी का सबसे ज्यादा असर हड्डियों पर पड़ता है जिसके कारण हड्डियों के टूटने की संभावना बढ़ जाती है।

मांसपेशियां कमजोर होना और बार-बार गिरना

विटामिन डी3 की कमी के कारण (Causes of Vitamin D3 Deficiency) मांसपेशियों में न सिर्फ दर्द होता है बल्कि वह कमजोर भी हो जाते हैं क्योंकि  मांसपेशियों के कार्य को बेहतर बनाने में विटामिन डी3 काम करता है।

उच्च रक्त चाप और दिल की बीमारी

कई अध्ययनों में ये बताया गया है कि विटामिन डी3 की कमी (Vitamin D3 Deficiency) से दिल का दौरा पड़ने की संभावना रहती है। इसलिए रक्त चाप को हमेशा नियंत्रण में रखने की जरूरत होती है

कैंसर

शायद आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि जितना ब्लड में विटामिन डी होगा उतना कोलोन कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है । कुछ रिसर्च ये कहती हैं कि जरूरत से ज्यादा विटामिन-डी की कमी एक समय के बाद कैंसर को बढ़ावा दे सकती है। विटामिन-डी की कमी से होने वाले कैंसर  हैं-

  • ब्रेस्ट कैंसर
  • प्रोस्टेट कैंसर
  • स्किन कैंसर (ये जरूरत से ज्यादा सूरज की धूप में रहने के कारण भी हो सकता है)
  • कोलन कैंसर
  • विटामिन-डी की कमी से कैंसर से पहले शरीर में अन्य बहुत सारी परेशानियां भी हो जाती हैं जिनमें शामिल हैं-
  • ऑटोइम्यून समस्याएं बढ़ जाना
  • स्नायविक रोग (neurological diseases)
  • गर्भावस्था में जटिलताएं
  • शरीर में अन्य तरह के संक्रमण होना
  • हाई ब्लड शुगर लेवल
  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस (sclerosis)
  • जलन

विटामिन डी ज्यादा होने के क्या नुकसान होते हैं?


सूर्य के प्रकाश से विटामिन डी शरीर में ज्यादा नहीं होता लेकिन अगर आप विटामिन डी सप्लीमेंट का अधिक मात्रा में सेवन करते हैं तो शरीर में जरूरत से ज्यादा विटामिन डी बढ़ जाता है। ऐसा होने पर सबसे पहले आपको विटामिन डी की गोलियां लेने पर रोक लगा देनी चाहिए। शरीर में विटामिन डी बढ़ जाना या हाइपरविटामिनोसिस डी होना एक खतरनाक स्थिति है। ऐसा होने से शरीर को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। जानिए विटामिन डी बढ़ने से होने वाली बीमारियां।

हड्डियों में दर्द
टामिन डी बढ़ने के कारण रक्त प्रवाह में ज्यादा कैल्शियम बढ़ सकता है। इससे हार्मोन के लिए हड्डियों को पोषक तत्व पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। इस वजह से हड्डियों में दर्द होने लगता है और फ्रेक्चर या अंदरूनी चोट का खतरा बढ़ जाता है।

किडनी में दिक्कत
विटामिन डी की अधिकता से किडनी डैमेज का खतरा हो सकता है। विटामिन डी बढ़ने से खून में कैल्शियम का स्तर बढ़ने लगता है, जो यूरिन की मात्रा को भी बढ़ा सकता है। यूरिन बढ़ने हमेशा टॉयलेट जाने की परेशानी होती है। इस दिक्कत को ‘पॉल्यूरिया’ कहा जाता है। 

किस उम्र में कितने विटामिन डी की ज़रुरत होती है?

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च  (Indian council of medical research) के अनुसार भारतीयों के लिए RDA (Recommended Dietary Allowance) की मात्रा उम्र के हिसाब से जो होनी चाहिए वह निम्नलिखित है-

1-50 साल : 5 माइक्रोग्राम्स (200 IU)

50 साल या उससे ज्यादा : 10 माइक्रोग्राम (400 IU)

गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माँ : 5 माइक्रोग्राम (200 IU)


विटामिन डी की आपूर्ति किस प्रकार करनी चाहिए ?

विटामिन डी के स्तर का रक्त में मापने के लिए 25(OH)D का प्रयोग किया जाता है। इस मापक का अर्थ है कि शरीर में विटामिन डी कितनी मात्रा में है। दिए गए स्तरों के अनुसार किसी के शरीर में विटामिन डी के स्तर को मापा जा सकता है।

लैब में विटामिन डी 25 OH की रेंज ng/ml या nmol/liter में मापा जाता है.

  • जब विटामिन डी का रेंज 20 ng /ml या 50 nmol/L से कम होता है तो विटामिन डी की कमी मानी जाती है.
  • वहीं जब विटामिन डी का रेंज 20 ng/ml या 50 nmol/L से 29 ng/ml या 74 nmol/L अपर्याप्त माना जाता है.
  • विटामिन डी की नॉर्मल रेंज 75 nmol/L से  250 nmol/L होती है.
  • 250 nmol/L से अधिक विटामिन डी की रेंज होने पर खतरनाक माना जाता है.

आपके शरीर को कितने विटामिन डी की आवश्यकता है, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। इन कारकों में उम्र, नस्ल, मौसम, सूरज का प्रदर्शन, कपड़े और बहुत कुछ शामिल हैं। इसके अलावा अधिक वजन वाले या मोटे लोगों को अधिक मात्रा में विटामिन डी की आवश्यकता हो सकती है। इन सभी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर माना जाता है कि व्यक्ति को आम तौर पर 1000-4000 IU विटामिन डी की  दैनिक तौर पर सेवन करना चाहिए। जो भी हो विटामिन डी का सेवन एक डॉक्टर की सलाह पे ही करें।


विटामिन डी की कमी का उपचार  कैसे करें?

कैसे लें सुरक्षित रूप से विटामिन डी जानिए-

विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए आपको अपनी जीवनशैली और खानपान में कुछ खास बदलाव लाने की आवश्यकता होती है। शरीर में विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए आप निम्न खानपान की आदतों और  चीजों  को अपनी डाइट में शामिल करें- 

  • धूप में बैठना

धूप यानी सूरज की रौशनी विटामिन डी का सबसे अच्छा और प्राकृतिक स्रोत है। आप धूप से अपने शरीर में विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकते हैं। धूप से विटामिन डी पाने के लिए आप रोजाना सुबह कुछ समय तक धूप में बैठ सकते हैं।गर्मियों के दिनों में, दोपहर के समय सूरज की रोशनी पाने का सबसे अच्छा समय होता है, क्योंकि इस समय सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणें तेज होती हैं। इसलिए आपको इस समय रोशनी में कम समय के लिए रहना पड़ेगा। कई अध्ययनों में पाया गया है कि कि दोपहर के समय विटामिन डी बनाने में शरीर सबसे सक्षम होता है।

  • हफ्ते में तीन बार १५-३० मिनट तक धूप में रहने से विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में मिल सकता है।
  • इस से ज़्यादा समय धुप में बिताते हैं तो सनस्क्रीन लगाना उचित होगा। 
  • ज़्यादा धूप  में रहने के अपने जोखिम होते हैं जैसे सनबर्न, तापघात और आँखों का नुक्सान। इसलिए सावधानी से धूप का उपयोग करें।  
  • अंडे की जर्दी- अंडा में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं। अंडा की जर्दी में विटामिन डी मौजूद होता है। अगर आप विटामिन डी की कमी को पूरा करना चाहते हैं तो अंडा का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है

  • मछलीअगर आप नॉन-वेज खाने वालों में से हैं तो कुछ ख़ास तरह की मछलियां आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। हेरिंग, टूना, मैकेरल और सैल्मन मछलियों में विटामिन डी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। आप इन मछलियों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

  • गाय का दूध ,गाय के दूध में विटामिन डी और कैल्शियम का बेस्ट स्रोत है। विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए आप रोजाना एक गिलास गाय का दूध पी सकते हैं। इससे काफी फायदा होगा

  • दही भी विटामिन डी का एक बढ़िया स्रोत है। यह आपको विटामिन डी प्रदान करने के साथ-साथ आपके शरीर को ठंडा भी रखता है। गर्मी के मौसम में दही पेट के लिए फायदेमंद होता है।

इन सबके अलावा, आप विटामिन डी के आहार में निम्न चीजों को शामिल कर सकते हैं:-

  • मीट
  • संतरा
  • अनाज
  • ओट्स
  • मशरूम

इन सबकी मदद से आप अपने शरीर में विटामिन डी की कमी को आसानी से पूरा कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि किसी भी चीज का सेवन करने से पहले आप एक बार डॉक्टर से अवश्य परामर्श करें।

विटामिन डी के स्तर को जल्दी कैसे बढ़ाएं?

विटामिन डी के स्तर को जल्दी बढ़ाने के लिए आप निम्न कार्यों को अपनी जीवनशैली में अपना सकते हैं:-

  • रोजाना सुबह धूप में बैठना
  • डेली डाइट में फलों और सब्जियों को शामिल करना
  • दूध, दही और मछली ,मशरूम का सेवन करना
  • विटामिन डी सप्पलीमेंट का सेवन करना 

सप्लीमेंट कब और क्यों जरूरी होते हैं ?

 सप्लीमेंट विटामिन की कमी को जल्द दूर करने में बहुत असरकारी होते हैं। इसलिए विटामिन डी की कमी को जल्द  दूर करने के लिये डाक्टर विटामिन डी सप्लीमेंट लेने की सलाह देते हैं।

वेस्टीज विटामिन D एब्सॉर्विट सब्लिंगुअल ओरल स्प्रे, 
( विटामिन डी सप्लीमेंट ) तेजी से विटामिन डी की कमी दूर करने बेहद असरदार होता है  जो अन्य दवाओं या सप्लीमेंट की तुलना  में 10 गुणा अधिक तेजी से शरीर में अवशोषित होता है 
(VESTIGE PRIME ABSORVIT VITAMIN D SUBLINGUAL SPRAY ) एब्सॉर्विट विटामिन डी सब्लिंगुअल स्प्रे एक अनोखा उपाय है  (सब्बलिंगुअल स्प्रे) है जो विटामिन लेने के पारंपरिक तरीके टैबलेट, कैप्सूल या पाउडर से अलग है।  वेस्टीज प्राइम एब्सॉर्विट विटामिन डी सब्लिंगुअल स्प्रे सीधे मुँह में जीभ के नीचे लार ग्रंथियों के ऊपर छिड़का जाता है जो सीधे  रक्त प्रवाह मिल जाता है ।


वेस्टिज विटामिन D एब्सॉर्विट सब्लिंगुअल ओरल स्प्रे क्यों अनोखा है?

 दैनिक आहार में विटामिन डी की कमी ज्यादातर गोलियों, कैप्सूल या पाउडर  के माध्यम से पूरी की जाती है, लेकिन इनका अवशोषण और प्रभाव कम होता है। भारत में अपनी तरह का पहला, नया और अनोखा तरीका है 

VESTIGE PRIME ABSORVIT VITAMIN D SUBLINGUAL SPRAY पारंपरिक रूपों से एक निश्चित बढ़त रखता है, क्योंकि इसे जीभ के नीचे स्प्रे किया जाता है और इस तरीके से विटामिन डी  का अवशोषण 3-10 गुना अधिक होता है।

 टैबलेट, कैप्सूल या पाउडर आँतों के माध्यम से खून में मिलकर शरीर मे अवशोषित होते है और इस प्रक्रिया में काफी वक्त लगता है और कम हिस्सा (करीब 40%) ही अवशोषित हो पाता है जिसके परिणामस्वरूप पर्याप्त डोज लेने के बाद भी शरीर को उतना फायदा नहीं मिलता है जो समय और धन की बरबादी ही है।

जीभ के नीचे सीधे स्प्रे करने से विटामिन डी सीधे खून मे मिलकर शरीर में अवशोषित होता है और कुल स्प्रे का 90% से अधिक हिस्सा अवशोषित हो जाता है जो शीघ्र और अधिक असरकारक बन जाता है।

 84 % लोग  टैबलेट या कैप्सूल के साइज की वजह से दवाई खाने में कतराते हैं जबकि  40%  लोगों को टैबलेट ,कैप्सूल निगलने में दिक्कत होती है और जबकि ओरल स्प्रे इन सब समस्याओं का सरल और प्रभावशाली तरीका है ।

वेस्टीज विटामिन D एब्सॉर्विट सब्लिंगुअल ओरल स्प्रे  के अनोखे फायदे-

तेज गति वाली जीवन शैली में तनाव, कम  समय सीमा, व्यस्त कार्यक्रम और अस्वास्थ्यकर आदतों ने हमारे दैनिक जीवन पर कब्जा कर लिया है। 

  • ओरल सब्लिंगुअल स्प्रे दुनिया भर में नए ट्रेंडिंग डोज़ फॉर्म हैं क्योंकि ये उपयोग करने में बहुत सुविधाजनक हैं। 
  • उन्हें सीधे जीभ के नीचे स्प्रे किया जाता है और उच्च क्वालिटी के साथ सबसे जल्दी  बेहतरीन रिजल्ट देने वाले   होते है क्योंकि वे सीधे खून में मिलकर  शरीर में समा जाते हैं।
  • यह पोषक तत्वों के तेजी से अवशोषण में मदद करता है।  
  • निगलने की समस्या वाले लोगों के लिए इसका उपयोग करने का तरीका वरदान से कम नहीं है।  
  • यह शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस के अवशोषण और वितरण  में मदद करता है जिससे हड्डियों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। 
  •  इसमें जलनरोधी और सूजनरोधी गुण हैं ।
  • वेस्टीज विटामिन डी प्राइम एब्सॉर्विट सब्लिंगुअल ओरल स्प्रे न केवल विटामिन डी की मात्रा बढ़ाने और बनाए रखने में मदद करता है बल्कि प्रतिरक्षा में सुधार करने के साथ-साथ स्वस्थ हड्डियों, रक्त वाहिकाओं और दांतों को बनाए रखने में भी मदद करता है। 
  • सब्लिंगुअल ओरल स्प्रे फ्लू और मौसमी एलर्जी से भी लड़ेगा जो बदलते मौसम के दौरान काफी आम हैं।
  • अच्छे स्वाद, तेज अवशोषण और बेहतर परिणामों के साथ एक सरल और सुविधाजनक समाधान है 
  • वेस्टीज प्राइम एब्सॉर्विट सब्लिंगुअल ओरल स्प्रे भी शाकाहारी विकल्पों में उपलब्ध हैं।

वेस्टीज विटामिन D एब्सॉर्विट सब्लिंगुअल ओरल स्प्रे  की खुराक कैसे लें?

  • रोजाना केवल एक स्प्रे जीभ के नीचे करना काफी है।
  • इस्तेमाल करने से पहले स्रे बोतल को अच्छी तरह हिलायें ।
  • ध्यान रखें कि स्प्रे करने के तत्काल बाद कुछ ( मिनट 5-10 ) तक कुछ खायें पीयें ना।
  • कोशिश करें ब्रेकफास्ट या डिनर के आधा एक घंटें पहले या बाद  या सोते समय इसे  लें।
  • बच्चे , गर्भावती और दूग्धपान करानी वाली माताएं इसका सेवन ना करें।
  • एक पैक में 45 खुराक होती हैं ,जो 45 दिन के लिये काफी हैं। 

वेस्टीज विटामिन D एब्सॉर्विट सब्लिंगुअल ओरल स्प्रे  कैसे खरीदें?


वेस्टिज के किसी भी सेंटर से या वेस्टिज ऐप या शापिंग वैबसाइट से खरीद सकते हैं। खरीदने के लिये आपको अपना वेस्टिज रजिस्टर्ड कंज्यूमर नंबर या डिस्ट्रीब्यूटर नंबर देना होगा ।

अगर आप रजिस्ट्रेशन किये बगैर इसे वेस्टिज सेंटर से खरीदना चाहते हैं तो आर्डर फार्म पर वेस्टिज डिस्ट्रीब्यूटर आई डी नंबर - 85726706 डालकर खरीद सकते हैं ।

अगर आप इसे औनलाइन खरीदना चाहते हैं तो 9891773879 पर ह्वाट्सएप से संपर्क करें।

वेस्टिज के रजिस्टर्ड कंज्यूमर बनकर भी आप इस प्रोडक्ट से या अन्य प्रोडक्ट से अपनी और अपनी फैमिली की सेहत को और भी बेहतरीन बना सकते है।

वेस्टिज से जुड़ने के लिये हमारे अन्य लेख वेस्टिज बिजनेस ज्वाइन कैसे करें? How to Join Vestige Business? को पढ़े और उसमे बताये गये तरीके से अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं या ऊपर बताये ह्वाट्सएप नंबर पर संपर्क कर सकते हैं


वेस्टीज विटामिन D एब्सॉर्विट सब्लिंगुअल ओरल स्प्रे  की कीमत कितनी है?

 
एक पैक की MRP ₹ 560 है ,वेस्टिज के रजिस्टर्ड कंज्यूमर या डिस्ट्रीब्यूटर के लिये यह कीमत ₹  480 है।


वेस्टीज विटामिन D एब्सॉर्विट सब्लिंगुअल ओरल स्प्रे (VESTIGE PRIME ABSORVIT VITAMIN D SUBLINGUAL SPRAY ) के  बारें में और अधिक जानकारी के लिये ऊपर बताये ह्वाट्सएप नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।


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